गुरुवार, 2 जून 2016

नसा मोबाइल के


दिखब म चिक्कन चांदर,चाल हे आरूग परिया।
पहिनब बर हे जिंस पेंट, रंग हे बिरबिट करिया।।
हीरो बरोबर चूंदी हे ,ममहाती परफ्यूम लगाय।
नांक बांचय नथनी ,हटहा बाली कान झुलाय।
एन्ड्राएड मोबाइल हाथ मा,नइहे थोरको बैलेन्स।
फोन लगाएल कहिबे ,मुकबधिर कस सैलेन्स।।
कान लगा ईयरफोन सुनत रहिथे फिल्मी गाना।
भैरा कही सूनय नही ,खंचवा म जाके झपाना।।
फेसबुक अउ वाट्सप म हुदरत सूदरत रहिथे।
आए न जाए कही नीही,सो नाइस वॉव कहिथे।।
रात अउ दिन मोबाइल म, नेट बैलेस डलात हे।
काम बूता ठिकाना नीही,फोकट पइसा गलात हे।।
लइका ल देख ददा कहे,मरगेंव रे तोर फेशन में।
हमर तन ले तेल निकले,फेशन के तोर टेंशन में।।
वाह रे मोबाइल जमाना , बस अपन करी डारे।
खाए पिए सुध नीही ,ए मोबाइल मया के मारे।।
अतिक घलक परान ,मोबाइल म झन खुसेरव।
नवा सोंच रद्दा नवा बर, अंजोर नवा बिखेरव।।
सुघर अकन मोबाइल के, होवय सही उपयोग।
मनखे ले मनखे जोड़थे, इही हे सच्चा योग।।
‪#‎आचार्य_तोषण‬

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