गुरुवार, 30 जून 2016

जब तक है जान.....


आचार्य तोषण चुरेन्द्र की फ़ोटो.
इस बात पे हैरान हूं
कि मेरे लोग मुझसे परेशान है
मैं तो मैं मेरी जिन्दगी मुझसे हलाकान है।
अंतरात्मा मेरी पूछती मुझझे
क्यों तू ऐसा करता है?
दूसरों के दुख के खातिर
अपनों से तू लड़ता है।
क्या मिलता है तुझे
लोगों के काम में हाथ बटाकर
अपना बेशक़ीमती समय फालतू में गंवाकर
समय मेरा बेशकीमती कहता हूं सबसे
काम आऊं सबके सदा कहता हूं रब से
मेरे इतने कहने से रब पड़ गया हैरान में
कहने लगा तुझसा तोषण नहीं कोई जहान में
तेरी इसी दरियादिली के हम तो हुए कायल
लोगों के दुख उठाते तुम कभी न होगे घायल
रब की नेमत मुझपर हुई मेरा यह नसीब है
उस परवरदिगार के आगे अमीर कौन गरीब है
समझाया उस रब ने मुझको करना नेक काम
याद सदा करेंगे तुझको लब पे रखेंगे नाम
रब के आगे मेरी क्या चलती
माननी पड़ी उनकी हर बात
छोटे बड़े अपने पराए सबसे करता मीठी बात
उसने मुझे सिखाया है
उपकार का पाठ पढाया है
गिर रहा था पर्वत पर चढ़ कर
मुझ गिरते को उठाया है
करता रहूंगा सदा मैं रब की गान
इस तन में जब तक है जान.....
-आचार्य तोषण

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