गुरुवार, 2 जून 2016

#‎बबा_के_बात‬...


घाम पियास ल सहिके बबा
लइका ल बढाएस जग मा।
खुद के आईस पारी तब
छोड़दिस भटके बर मग मा।

अंगरी धरके चलाए रद्दा
कांटा खुंटी ल बचाके।
कोदई बासी खुदे खाए
दार अउ भात खवाके।
आज तोर गति नइहे
सेखिया टुरा के घर मा।
दुध ले माछी बरोबर
दूरिहा दिस पल भर मा।
भीख मंगवाए तोला बबा
बने बने अपन खात हे।
तोरे कमई के धन ला गा
फूदर फूदर उरकात हे।
ए दर दर तोला भटकाए
खुसरे हबे अपन घर मा।
करम के लेखा मेटे न मिटे
फेर पारी आही पल भर मा।
कथे सियान सुन रे बाबू
घुरूवा के दिन बहरथे।
जइसने तैहर बांटबे
ओईसने ओहर लहुटथे।
दाई ददा के सेवा कर
तभे मेवा ल पाबे गा।
जेखर चरन चारो धाम
जियत मुकति पाबे गा।
‪#‎आचार्य_तोषण‬

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