हे मातृ भूमि जिनगी भर
तोरेच गुन ला गावंव
तभो ले तोरे पार कहां ले पावंव
सबले ऊंचहा माथा ह तोरे
सागर खड़े हे हांथ ल जोरे
दसों दिशा संग संझा बिहनिया तोला माथ नवावंव.....
खडे हिमालय तनके रकछक
बैरी मन बर बनके भकछक
हरिहर रूख कस बन मैं अचरा छंइहा सुघर बगरावंव....
तोर सेवा म मरमिट जाहूं
तन मन सबला तोला लुटाहूं
धरके तिरंगा हांथ म दाई लहर लहर लहरावंव...
तोर कथनी हे अगम अपारा
गावय जेला सब संसारा
घेरी बेरी चरन म दाई मैहर माथ नवावंव....
-आचार्य तोषण
तोरेच गुन ला गावंव
तभो ले तोरे पार कहां ले पावंव
सबले ऊंचहा माथा ह तोरे
सागर खड़े हे हांथ ल जोरे
दसों दिशा संग संझा बिहनिया तोला माथ नवावंव.....
खडे हिमालय तनके रकछक
बैरी मन बर बनके भकछक
हरिहर रूख कस बन मैं अचरा छंइहा सुघर बगरावंव....
तोर सेवा म मरमिट जाहूं
तन मन सबला तोला लुटाहूं
धरके तिरंगा हांथ म दाई लहर लहर लहरावंव...
तोर कथनी हे अगम अपारा
गावय जेला सब संसारा
घेरी बेरी चरन म दाई मैहर माथ नवावंव....
-आचार्य तोषण
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