मंगलवार, 28 जून 2016

हे मातृ भूमि

 हे मातृ भूमि जिनगी भर
 तोरेच गुन ला गावंव
तभो ले तोरे पार कहां ले पावंव
 सबले ऊंचहा माथा ह तोरे
सागर खड़े हे हांथ ल जोरे
दसों दिशा संग संझा बिहनिया तोला माथ नवावंव.....
खडे हिमालय तनके रकछक
 बैरी मन बर बनके भकछक
हरिहर रूख कस बन मैं अचरा छंइहा सुघर बगरावंव....
 तोर सेवा म मरमिट जाहूं
 तन मन सबला तोला लुटाहूं
धरके तिरंगा हांथ म दाई लहर लहर लहरावंव...
 तोर कथनी हे अगम अपारा
गावय जेला सब संसारा
घेरी बेरी चरन म दाई मैहर माथ नवावंव....
                             -आचार्य तोषण

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