~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ गणपति महाराज के गा,महिमा गजब भारी। पूजाए जग मा पहली, सुमरे सब नर नारी। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ कवन पूजाही आघू, जंग छिडय दुन भई म। करे तैयारी सुघर मिल, बाहन के संमरई म।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मंजूर धर कातिक निकले,जगत घुमेबर जावय। मूसवा देख गणेश बइठे, जुगति अपन सुझावय।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ दाई ददा ल करे नमन, चककर सात लगाय। आशीष दे शंखर गौरा, बुद्धि अजब तै पाय।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ देवतन के आशीष मिलै, दे जग ल प्रभु बताय। पहली पूजाही गणेश, सुन सबे खुशी मनाय।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ रिद्धि सिद्धि के दाता तै, शुभ लाभ बेटा तोर। चरन म ध्यान लगावंव,आस पुरोदे बप्पा मोर।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ तोर चरन आहे तोषण, जग बर सुख मांगत हे। हाथ जोड़ बिनती करके, तोर भजन गावत हे।। ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ आचार्य तोषण, धनगांव, डौंडीलोहारा |
गुरुवार, 30 जून 2016
॥गणपति महाराज॥
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