गुरुवार, 2 जून 2016

मोर गुंइयां रे...


मोर गुंइयां रे मोला संग रेंगाले ना.२
मर जहूं तोर बिना.२ बिहा रचाले ना
मोर गुंइयां रे मोला संग रेंगाले ना.२
सपना देखाए मया पीरीत के
काबर तै संगवारी।
तोर सुघरई मा होगेंव दीवानी
किंजरो जंगल झारी
पीरीत के डोरी संगमा.२ मया बंधाले ना
मोर गुंइयां रे मोला संग रेंगाले ना.२
किरिया खवाए आनी बानी के
मया के कुरिया बसाबो
सुख दुख म रहिबो संगी
मया के फूल खिलाबो
तैहर मोर राजा बइहा.२ रानी बनाले ना
मोर गुंइयां रे मोला संग रेंगाले ना.२
मोर मनके सुवा राजा
मैं तोर मैना रानी
हाथले अपन पियादे राजा
मया पीरीत के पानी
तैहस मोर मया के सागर.२ नदी बनाले ना
मोर गुंइयां रे मोला संग रेंगाले ना.२
मर जहूं तोर बिना बिहा रचाले ना

गीत रचना:-आचार्य तोषण
गांव:-धनगांव डौंडीलोहारा
जिला:-बालोद छत्तीसगढ़
पिन:-४९१७७१
मो.:-९६१७५८९६६७

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...