छत्तीसगढ़ीहा आचार्य तोषण
के छत्तीसगढ़ी स्वर वर्णमाला
#अनपढ गंवंइहा किसान,पढे लिखय नइ जानंव।
#आवय जावय कछु निही,कतिक ल मैहा तानंव।
#इही भुंइया के सेवा बजावत,जिनगी मोर गुजरय
#ईमानदारी ले करम करंव,अतकी धरम ल मानंव।।
के छत्तीसगढ़ी स्वर वर्णमाला
#अनपढ गंवंइहा किसान,पढे लिखय नइ जानंव।
#आवय जावय कछु निही,कतिक ल मैहा तानंव।
#इही भुंइया के सेवा बजावत,जिनगी मोर गुजरय
#ईमानदारी ले करम करंव,अतकी धरम ल मानंव।।
#उवत सुरूज बासी धरके,खेतखार कोती जाथंव।
#ऊरपेट्टा मंझनिया बेरा, बासी चटनी नून खाथंव।
#एडी के जात बोहाय झरे, पसीना झरझर तन ले
#ऐंठय घाम सोजहा मुड़ी, छंइहा म जा सुरताथंव।।
#ओगरथे भुंइया ले पानी,दिन रात इंहा कमई मा।
#औंटाथन अपन तन ला, घाम पियास झंवई मा।
#अंगूर के दाना बरोबर,सपड़थे हमनला खवई मा
#अ: नइ निकले मुंह ले, भुंइया के सेवा बजई मा।।
॥छत्तीसगढ़ महतारी की जय॥
॥आचार्य तोषण॥
#ऊरपेट्टा मंझनिया बेरा, बासी चटनी नून खाथंव।
#एडी के जात बोहाय झरे, पसीना झरझर तन ले
#ऐंठय घाम सोजहा मुड़ी, छंइहा म जा सुरताथंव।।
#ओगरथे भुंइया ले पानी,दिन रात इंहा कमई मा।
#औंटाथन अपन तन ला, घाम पियास झंवई मा।
#अंगूर के दाना बरोबर,सपड़थे हमनला खवई मा
#अ: नइ निकले मुंह ले, भुंइया के सेवा बजई मा।।
॥छत्तीसगढ़ महतारी की जय॥
॥आचार्य तोषण॥

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