मंगलवार, 28 जून 2016

दवात मेरी है

मेरा संवरना बालम बिन अधुरी है
तमन्ना दिल की तुझसे ही पूरी है।
 नजर ना आए तू मुझको साजन
फिकी लगे हर मौसम सिन्दूरी है।
  न जाना कभी मुझसे बिछड़कर
 इल्तिजा बस यही तुझसे मेरी है
 महकाते रहना यूं बनकर खुशबू
 गुल भी तेरी गुलज़ार भी तेरी है
कह ना पाए कभी दो लब्जों में
 दास्तां-ए-इश्क ये तेरी मेरी है
 लिख नाम अपनी जान ऐ'तोषण'
 कलम गर तेरा तो दवात मेरी है

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