शनिवार, 25 जून 2016

॥बादर॥


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धान कोठरी ले हेराय परे हे
खेत खलिहान चतराय डरे हे
कोन जनी कहा लुकागे रे बादर
संसो म बबा ह तरवा ल धरे हे
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जजबात तो बने हे तोर बात मा
का जादू हे ओखर करामात मा
देख हवा गरेल मन ला लागय
झूम बरसही आज बादर रात मा

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फलक ले फलकत आवय पानी
धन्य होगे मोर तोर जिनगानी
मन लगाके अब धान बोंलय
आगे दिन अब खेती किसानी
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आजा झुमर के तै आसाढ़ म
भुंइया सुखावय ठाढ़े ठाढ़ म
अइसे जमदरहा बरसबे तै
झन बोहावय कोनो बाड़ म
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एसो के सावन बने बरसाबे
झन कोनों ल तै तरसाबे
हंसी खुसी मया बांटत रहिबे
झन कोनों ल तैहा रोवाबे
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॥आचार्य.तोषण॥

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