शनिवार, 25 जून 2016

मंहगाई

अच्छाई का जमाना रहा कहां हिन्दुस्तान में
राजनीति की आड़ में जहाँ भ्रष्टाचार पनपती है।
अच्छे दिन आएंगे कब आएंगे अच्छा कब पाएंगे
आसरा लिए जनता हर पल हर दिन तरसती है।
मार रही मंहगाई दिनोंदिन हर गरीब इंसानो को।
बना चाय राजनेता पीगए हम सबके अरमानों को।
सुध ले लो हम गरीब परिवार वालों की कुछ तो
ना करना पड़े आत्महत्या हम जैसे किसानों को।
मंहगाई की मार ने इतना हमें मजबूर कर दिया है।
अच्छे भले किसान आज हमें मजदूर कर दिया है।
कोसते हैं आज हम समझदारी और अपने आपको
मतदान पा हमें मक्खी जैसे दूध से दूर कर दिया है।
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद (छ.ग)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

राम नाम

राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...