अच्छाई का जमाना रहा कहां हिन्दुस्तान में
राजनीति की आड़ में जहाँ भ्रष्टाचार पनपती है।
अच्छे दिन आएंगे कब आएंगे अच्छा कब पाएंगे
आसरा लिए जनता हर पल हर दिन तरसती है।
राजनीति की आड़ में जहाँ भ्रष्टाचार पनपती है।
अच्छे दिन आएंगे कब आएंगे अच्छा कब पाएंगे
आसरा लिए जनता हर पल हर दिन तरसती है।
मार रही मंहगाई दिनोंदिन हर गरीब इंसानो को।
बना चाय राजनेता पीगए हम सबके अरमानों को।
सुध ले लो हम गरीब परिवार वालों की कुछ तो
ना करना पड़े आत्महत्या हम जैसे किसानों को।
मंहगाई की मार ने इतना हमें मजबूर कर दिया है।
अच्छे भले किसान आज हमें मजदूर कर दिया है।
कोसते हैं आज हम समझदारी और अपने आपको
मतदान पा हमें मक्खी जैसे दूध से दूर कर दिया है।
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद (छ.ग)
बना चाय राजनेता पीगए हम सबके अरमानों को।
सुध ले लो हम गरीब परिवार वालों की कुछ तो
ना करना पड़े आत्महत्या हम जैसे किसानों को।
मंहगाई की मार ने इतना हमें मजबूर कर दिया है।
अच्छे भले किसान आज हमें मजदूर कर दिया है।
कोसते हैं आज हम समझदारी और अपने आपको
मतदान पा हमें मक्खी जैसे दूध से दूर कर दिया है।
आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा बालोद (छ.ग)

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