*माटी सान कुम्हार तय, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तय अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*हवय गुरु कुम्हार कस,चेला बड़ सिधयाय।*
*कोनों गिनहा झन रहय,सब बर ध्यान लगाय।।*
*माटी सान कुम्हार तैं, दीया अजब बनाय।*
*रहिके तैं अँधियार मा,जग अँजोर पहुँचाय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
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