सोमवार, 22 मई 2017

तोषण के दोहे

(१)
*प्रेम...बोल तू बोल रे , राह  रही हूँ ताक।*
*बिना प्रेम के जीवरा, देह होय रे खाक।।*

(२)
*आय जगत  तै कंगला , ढेर  दौलत  कमाय।*
*जीयत भरके तोर जी, जुच्छा जमपुर जाय।।*

(३)
*ददा कहे  बेटा मनी, बात मान ले मोर।*
*खेत खार चेतार ले, हाथ चला ते जोर।।*

(४)
*गाँव खार के खेत के , का करथस जी गोठ।*
*बोय जिहाँ कोदो तिली , बने  रहे  गा पोठ।।*

(५)
*धनिया  भाटा  खेखसी , लागे  नदिया तीर।*
*मिरचा नुनछुर डार के , केकड़ी धरके चीर ।।*

(६)
*आवत कुल्फी देखके ,  लइका लागे रोय।*
*पइसा रुपिया माँगके , आसा अपन पुरोय।।*

*तोषण कुमार चुरेन्द्र*

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