(१)
*प्रेम...बोल तू बोल रे , राह रही हूँ ताक।*
*बिना प्रेम के जीवरा, देह होय रे खाक।।*
(२)
*आय जगत तै कंगला , ढेर दौलत कमाय।*
*जीयत भरके तोर जी, जुच्छा जमपुर जाय।।*
(३)
*ददा कहे बेटा मनी, बात मान ले मोर।*
*खेत खार चेतार ले, हाथ चला ते जोर।।*
(४)
*गाँव खार के खेत के , का करथस जी गोठ।*
*बोय जिहाँ कोदो तिली , बने रहे गा पोठ।।*
(५)
*धनिया भाटा खेखसी , लागे नदिया तीर।*
*मिरचा नुनछुर डार के , केकड़ी धरके चीर ।।*
(६)
*आवत कुल्फी देखके , लइका लागे रोय।*
*पइसा रुपिया माँगके , आसा अपन पुरोय।।*
*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
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