गुरुवार, 18 मई 2017

देस के खातिर जीबो...

*देस के खातिर जीबो*
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कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...
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दाई ह राखे नव महीना ले
कोख म अपन पोटार के
जनम से लेके मरनी तक
धरती ह रखे हे सँवार के
छाती ले बोहे बनके गोरस
अमरित पानी पीबो....
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...१
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खेले जिंहाँ राणा शिवा
हमुला आथे मरेबर इंहाँ
लछमी तात्या के रनांगन
पांडव जीते युद्ध जिंहाँ
भगत अजाद सुखदेव सही
हमुहा मरके जीबो...
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...२
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कसम लाल बाल पाल के
अब बैरी ल धुर्रा चटाइंगे
आगुम आही बैरी दुसमन
राखर म ओला मिलाइंगे
भरके बोरा धरके सुंतरी
सुजा म जमके सीबो....
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...३
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आतंकी नक्सली के कारन
लाख बिपत ल सहत हवन
कब जागही भाग हमर जी
गोठ अतरी भर कहत हवन
बरा चुरोय म कहीं नी होवय
नास बर एकर भीड़बो...
कहिथे मन संगवारी मोरो
देस के खातिर जीबो...
अवघड़िया शंखर जइसन
हलहल जहर पीबो...४
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*तोषण कुमार चुरेन्द्र*
*धनगाँव डौंडी लोहारा*
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