जिनगी में कभू घमंड झन करबे "तोषण" माटी के बने हस माटी म मिलबे।
अभिवादन मंगलमयी बेला खिला आँगन
सूरज उगे बिखरती किरण कुसुम खिले।।
राम जपय शिवनाम को,शंकर हा श्री राम। राम नाम सब मन जपव,बनही बिगड़े काम। बनही बिगड़े काम,राम शिव संगी मितवा। करथे बेड़ा पार,बने जी सब...
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