रो पड़ती हूं जो देखती अपने बच्चों की नादानी
बातें मेरी न मानते बस करते अपनी मनमानी
काटते घने जंगल को पयार्वरण कर रहे खराब
गम के इस दलदल में बिखरी पड़ी ये जिंदगानी
बातें मेरी न मानते बस करते अपनी मनमानी
काटते घने जंगल को पयार्वरण कर रहे खराब
गम के इस दलदल में बिखरी पड़ी ये जिंदगानी
भूमि ये बंजर होती जहरीली दवाओं की मार से
क्यों छलनी मेरा सीना करते दो धारी तलवार से
हालत मेरी दयनीय है पीड़ा बड़ी असहनीय है
मन तुम्हारा द्रवित न होता करूण मेरी पुकार से
रह गई पुराणों में अब शायद मेरी महिमा बखान
कही गई कभी जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान
पेंड़ लगाकर कर रक्षा मेरी सदा मेरे प्यारे लाल
तोषण अब इंसानियत की कर परिभाषा पहचान
-आचार्य तोषण
क्यों छलनी मेरा सीना करते दो धारी तलवार से
हालत मेरी दयनीय है पीड़ा बड़ी असहनीय है
मन तुम्हारा द्रवित न होता करूण मेरी पुकार से
रह गई पुराणों में अब शायद मेरी महिमा बखान
कही गई कभी जननी जन्मभूमि स्वर्ग से महान
पेंड़ लगाकर कर रक्षा मेरी सदा मेरे प्यारे लाल
तोषण अब इंसानियत की कर परिभाषा पहचान
-आचार्य तोषण

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