शनिवार, 9 जुलाई 2016

मोर कलम...

मोर कलम...
 मोर कलम वो ताकत हे दिल सबके झकझोर दीही
आघू म आही जेन बइरी ह मुड़ी ल ओखर फोर दीही
नदियां जइसन एखर रवानी धरधरात जेन बोहाथे
पथरा घलक होजाथे चूर चूर जब आघू म टकराथे
बनाही शब्द के नरवा ढोरगा समुन्दर म हिलोर लीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
बइठे सुनावय बबा हमला शूरवीर शिवा के कहानी
तइहा जमाना के इही कलम लिख दिस अपन जुबानी
अमरीत छोड़ संखर जइसन जहर घलो सजोंर लीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
लिखिस गाथा सन संतावन के क्रांति के आगी लगाइस 
अंगरेजन के आंखी फोडिस सडतालीस में जेला कूदाइस
 झांसी के तलवार चमकाइस गरगस्सा पूछी बड़ोर दीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
 कलम के इही परताप ले ग्रंथ बेद पुरान लिखाए हे
आदि अनंत अमर कहानी भाखा म एखर समाए हे
कलम रही जब तक तोषण के दीया कस अंजोर दीही
आघू म आही जेन बइरी हर मुड़ी ल ओखर फोर दीही
 #आचार्य तोषण

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