काला काहंव कइसे गोठियांव
रो रो के मन ला मढ़ा लेथंव
कहानी नोहे न किस्सा कोन्हो तभो ले तुंहला सुना देथंव
भुलाए बर तो भुला नीसकंव मन भीतरी ढांढस बंधा लेथंव
आहूं कहिके गेहे मोर पिरोहिल रद्दा म नयना ल बिछा लेथंव
दू दिन के चार दिन सहिके मयारूक के आस लगा लेथंव
सुरता जब आथे मोर मयारू के देखाएबर दुनिया ल मुसकुरा देथंव
दिल के उपके दुख दरद ल 'तोषण' गीत बनाके मया ल गुनगुना लेथंव
#आचार्य_तोषण
कहानी नोहे न किस्सा कोन्हो तभो ले तुंहला सुना देथंव
भुलाए बर तो भुला नीसकंव मन भीतरी ढांढस बंधा लेथंव
आहूं कहिके गेहे मोर पिरोहिल रद्दा म नयना ल बिछा लेथंव
दू दिन के चार दिन सहिके मयारूक के आस लगा लेथंव
सुरता जब आथे मोर मयारू के देखाएबर दुनिया ल मुसकुरा देथंव
दिल के उपके दुख दरद ल 'तोषण' गीत बनाके मया ल गुनगुना लेथंव
#आचार्य_तोषण
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें