शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

काला काहंव

काला काहंव कइसे गोठियांव रो रो के मन ला मढ़ा लेथंव
कहानी नोहे न किस्सा कोन्हो तभो ले तुंहला सुना देथंव
 भुलाए बर तो भुला नीसकंव मन भीतरी ढांढस बंधा लेथंव
आहूं कहिके गेहे मोर पिरोहिल रद्दा म नयना ल बिछा लेथंव
दू दिन के चार दिन सहिके मयारूक के आस लगा लेथंव
सुरता जब आथे मोर मयारू के देखाएबर दुनिया ल मुसकुरा देथंव
दिल के उपके दुख दरद ल 'तोषण' गीत बनाके मया ल गुनगुना लेथंव
 #आचार्य_तोषण

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