गुरुवार, 7 जुलाई 2016

छत्तीसगढ़ही

छत्तीसगढ़ही
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जीअव मुड़ी उठाके
अऊ रेंगव छाती ठोक ।
पढव लिखव बोलव
सुघर छत्तीसगढ़ी गोठ।।

छत्तीसगढ़ महतारी के
भाखा छत्तीसगढ़ी।
तहूं पढबे महू पढहूं
हमर पिढही पढही।।
नरवा डोरगा तरइय्या
अमरइय्या कसार मा।
छत्तीसगढ़ी गुंजत रही
गली खोर खेत खार मा।।
राजभाखा बनगे हावे
अब बेवहार मा लाना हे।
पुरखा मनके भाखा ल
सुघ्घर अकन सजाना हे।।
छत्तीसगढ़ के कोरा मा
छत्तीस फूल खिलाना हे।
तोषण घलो ह काहत हावे
ए फूलवारी महकाना हे।।
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-आचार्य तोषण
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