गुरुवार, 7 जुलाई 2016

छत्तीसगढ़ी रामायण

छत्तीसगढ़ी रामायण
जय श्री राम
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दशरथ घर मा जनम धरके
अवध के मान बढाईसे।
ताडका मार गिराए
अहिल्या ला उबारिसे।।
गिस जनक घर रघुवर हा
पिनाक धनुष ला टोरिसे ।
राजा जनक हा सुघ्घर
सीता संन रिशता जोड़ीसे।।
राज पाठ ल छोड़ के
जंगल के रद्दा बनाय।
चरण धोवै केंवट भैय्या
गंगा पार नहकाय।।
पंचवटी मा जाके बढ़िया
सीया लखन संन दिन बिताय।।
मारीच बनगे कपटी मिरगा
पाछू पाछू दौडाय।
कपटी रावन सीता माई ला
धर लेगे चोराय।।
शबरी के जूठा बोईर खाके
नवधा भगति सुनाय।
किसकिंधा मा जाके
सुगरीव ल मित बनाय।।
हनुमान सन बेंदरा भालू
सीया के शोर ल पाय।
हिन्द सागर मा पुलिया बांध
श्री रघुवर हा लंका जाये।।
मेघनाथ कुम्भकरण दानव
हरि यमपुर पहुचाय।
रावण ल फेर अपन हांथ ले
हरि हा मुक्ति देवाय।।
सीयाराम भाई लखन संन
अवध पुर लहुट आय।
इही खुशी मा अवधपुरी मा
घर घर दीया जलाय।।
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����जय श्री राम����

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