गुरुवार, 7 जुलाई 2016

नंदावत हे...

शीर्षक: नंदावत हे...
कहां नंदागे चिटठी पतरी संवदिया
अब तो मोबाइल के जमाना आवत हे।
एखर आए ले अंगठा बिचारा
अधरे अधर मा पछतावत हे।।

नंदावत हे फूलकंसिया थारी ह
स्टील थारी म भात सुहावत हे।
पाना के पतरी घलो नंदागे
अब कागज ह धाग जमावत हे।।
निंदई कोडई घलो नइ उसरे
निंदानाशक दवा सीतावत हे।
गोबर खातू दिखे नइ मिलै
डोली के उर्वरा सिरावत हे।।
सुर के भारा तको छुटगे
टेकटर हा भारा ढुलावत हे।
मिंजाई म दौंरी बेलन नंदागे
थ्रेशर हा भाग सौंरावत हे।।
दांत बर रिंया दतून नंदागे
टुथ ब्रशके मजा लेवावत हे।
बरश में दांत हा पोंडा होवै
चेंच भाजी ल फंसावत हे।
का कहनी अब कांहव मैहा
नवा जमाना आवत हे
तेखरी सेती मोर भैय्या
सरी जिनीस हा नंदावत हे।।
-आचार्य तोषण

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