
**************शिवजी**************
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हमर गांव के तरिया पार मा शिव जी ह बिराजे हे।
तिरशूल नंदिया बइला संग मा गला नांग ह साजे हे।।
सुघ्घर अकन परिवार हावै संग मा पारबती मइय्या ।
संगमा हावै गणेश अशोकसुंदरी कारतिक बड़े भइय्या।।
नर नारी मन तरिया मा रोज नहाय बर आथे।
पानी ओमा चढ़ा चढ़ा के मन के मनौती पाथे।।
शिव भगवान मा चढाथे बेल पान धथरा के फूल ।
सत रज तम के परतीक धरे हाथ अपन तिरशूल।।
औघड़ दानी एला कइथे मनबांछित दान देवइय्या ।
जहर पान करिस अपन ह अमरीत हमला धरइय्या।।
आवत हंव तोर तीर मा चरण राखले प्रभु तै मोला।
ए जग के तै पार लगइय्या पार नहकादे तै मोला।
अलवा जलवा भाखा मा तोरेच गुण ल गावंव।
मै अडहा तोषण हा तोर चरण माथ लमावंव।।
* सत्यम् शिवम् सुंदरम् *
-आचार्य तोषण
-आचार्य तोषण
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