शनिवार, 9 जुलाई 2016

॥ईर्ष्या /कपट/नफरत॥

॥ईर्ष्या /कपट/नफरत॥
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कमाई देख दूसरों के जिनका मन है जलता
ऐसे मनुष्य के जीवन में सुख कभी न फलता
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मेहनत करना जाने नही करते रहे नीत खिंचाई
ऐसे कायर लोगों के नाम आगे श्री कहा से आई
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बुरे लोगों से नही उनकी बुराईयों से डर लगता
पीठ पीछे छूरा घोंप आंखों के सामने से भगता
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इंसां कुछ ऐसे भी आसपास अभी हमने पाये
हंसते इन चेहरों के पीछे नफरत दिल में छुपाये
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कोयलिया जैसे तन के भीतर भरे कौंए की राग
ऐसे कपटी मानुस को नहीं मिलता कहीं अनुराग

कर ना कभी घमंड ऐ 'तोषण'मिट्टी में मिल जाना
याद करे ये दुनिया हमको काम ऐसा कर जाना
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आचार्य तोषण धनगांव डौंडीलोहारा

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