गुरुवार, 7 जुलाई 2016

तोर बिन...

तोर बिन...
आवत हे होरी जोही
जोहत हंव रद्दा तोर।
दिन रात के अगोरा मा
नैना ढरकत हे मोर।।

तोर बिन सुन्ना मोर
घर के अंगना कुरिया
करंव कइसे ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

पवन पुरवईय्या गावत हे
कोयलिया कुहकुआवत हे
कहां भुलाए मोर पिरोही
गांव-गंवई हा बलावत हे 

थोरकुन सुध तय लमाले
आरो घलो लेले मोर।
कइसे करंव ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

रंग गुलाल उड़ाहूं काकरसन
होरी तिहार मनाहूं काकरसन
जल्दी आजा मोर मयारू
हो जाही मोर मन हा परसन 

अगोरत हे तोला अडबड
गांव गली मोहल्ला खोर
कइसे करंव ए साल
होरी तिहार मा शोर।।

आवत हे होरी जोही
जोहत हंव रद्दा तोर।
दिन रात के अगोरा मा
नैना ढरकत हे मोर।।

तोर बिन सुन्ना मोर
घर के अंगना कुरिया
करंव कइसे ए साल
होरी तिहार मा शोर।।
-आचार्य तोषण

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