छत्तीसगढ़ के पागा कलगी ०४
रचना:- सरग के दुवार
दाई ददा के सेवा जतन कर,होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर, सुघर सरग के दुवार जी॥
रचना:- सरग के दुवार
दाई ददा के सेवा जतन कर,होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर, सुघर सरग के दुवार जी॥
अढ़हा केंवट भक्ति करके, राम ल पार लगाइस हे।
अपन संगे संग जम्मो पुरखा, ल रस्दा देखाइस हे।।
करले जोरा मुक्ति पाये के ,झन तै सोच बिचार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।।
रस्दा बनाइसे शबरी दाई ह, मतंग मुनि ल मान के।
सुख्खा बोईर सकेले रिहिस, राम ल कुटिया मा आही जानके।
डोंगा हावे रेटहा परेटहा, अब यहु ल बने संवार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर सुघर, सरग के दुवार जी।।
आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
डौंडीलोहारा जिला-बालोद(छ.ग.)४९१७७१
दूरभाष ९६१७५८९६६७
अपन संगे संग जम्मो पुरखा, ल रस्दा देखाइस हे।।
करले जोरा मुक्ति पाये के ,झन तै सोच बिचार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।।
रस्दा बनाइसे शबरी दाई ह, मतंग मुनि ल मान के।
सुख्खा बोईर सकेले रिहिस, राम ल कुटिया मा आही जानके।
डोंगा हावे रेटहा परेटहा, अब यहु ल बने संवार जी।।
दाई ददा के सेवा जतन कर, होही तोर उद्धार जी।
तभे ते पाबे जाये बर सुघर, सरग के दुवार जी।।
आचार्य तोषण
सरस्वती शिशु मंदिर
डौंडीलोहारा जिला-बालोद(छ.ग.)४९१७७१
दूरभाष ९६१७५८९६६७
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