जुबां से चाहकर कुछ कहे न कहे संगदिल
निगाहें तेरी हाल-ए-दिल बयां कर देती है.
मुरीद हूं तेरी मदभरी अदाओं का जालीम
रूह के इक कोने में मेरी घर कर देती है.
तेरे हुस्ने आफताब की क्या तारीफ करू
रश्मियों की बारिश में खुद संवर लेती है .
हो अंधेरी रात अगर तो मुझे शिकवा नहीं
बन उजाला राह मेरी शम्मा बिखर लेती है
सिहर जाऊं अगर तन्हा रातो में "तोषण"
आगोश में तेरी यादें मुझको भर लेती है.
#आचार्य_तोषण
निगाहें तेरी हाल-ए-दिल बयां कर देती है.
मुरीद हूं तेरी मदभरी अदाओं का जालीम
रूह के इक कोने में मेरी घर कर देती है.
तेरे हुस्ने आफताब की क्या तारीफ करू
रश्मियों की बारिश में खुद संवर लेती है .
हो अंधेरी रात अगर तो मुझे शिकवा नहीं
बन उजाला राह मेरी शम्मा बिखर लेती है
सिहर जाऊं अगर तन्हा रातो में "तोषण"
आगोश में तेरी यादें मुझको भर लेती है.
#आचार्य_तोषण
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