महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली
कंठ सरसती के वास रहाय
काफी कलम ह साथ रहाय।
अलवा जलवा लिखत रहूं
आपके आशीष के हाथ रहाय।
काफी कलम ह साथ रहाय।
अलवा जलवा लिखत रहूं
आपके आशीष के हाथ रहाय।
नइहे मोला शब्द के ज्ञान
थोरिक ना मात्रा के भान।
तुंहरे ल देख सिखत रहिथो
हावंव मै आरूग अनजान।।
थोरिक ना मात्रा के भान।
तुंहरे ल देख सिखत रहिथो
हावंव मै आरूग अनजान।।
करूआ करेला कस मोर बानी
सुन हिरदे होजाही चानी चानी
मन के पीरा निकालत रहिथौ
करथौ हरकत नित बचकानी।।
सुन हिरदे होजाही चानी चानी
मन के पीरा निकालत रहिथौ
करथौ हरकत नित बचकानी।।
छत्तीसगढ़ के गुरतुर बोली
लईका मन के हंसी ठिठोली।
आवौ हम बगराबो सुघ्घर
महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली।।
लईका मन के हंसी ठिठोली।
आवौ हम बगराबो सुघ्घर
महतारी के छत्तीसगढ़ी बोली।।
**जय छत्तीसगढ़ महतारी**
-आचार्य तोषण
-आचार्य तोषण
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