रविवार, 17 जुलाई 2016

बरसे बरखा आसाढ़ सावन

बरसे बरखा असाढ़ सावन

 नरवा बुडगे धार मा.
होईस किसानी डोली हरियागे
 धान लहरावय खार मा.
करे किसानी मन ल लगाके
भात खावय तात तात रे.
 थके मांदे घर म लहुटे
 सोवय मन भर रात रे.
मेंचका नरियावय झिंगुर बोले
जोगनी बरत हे रात मा.
 होवत बिहनिया कुकरा बासे
सूरूज नरायन हे साथ मा.
नींदे कोड़े बर बासी धरके
 चले लगिन किसान गा.
धरती दाई के सेवा बजाए
 मोर माटी के मितान गा.
सांवा बदऊर के करे चिन्हारी
 गोड़ेली बन ल छांटत हे.
सुआ करमा गावय ददरिया
मया पीरित ल बांटत हे.
देखे हरिहर धान ल संगी
मन मन सब मुसकावत हे.
 मांथ नवाए भइय्या तोषण
 भुंइया के गुन ल गावत हे.
~~~जय छत्तीसगढ़~~~
 तोषण
धनगांव%%%डौं.लोहारा

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