बुधवार, 13 जुलाई 2016

मंहगाई

मंहगाई रूकने का नाम ले सूरसा बन खोले मुंह यहीं
 बचकर निकलें कैसे मुंह से हर कोई बजरंगी तो नहीं
प्रतिदिन समस्या भारत की अब भयावह होती जा रही है
गेंहू चावल की तो बातें छोड़ो बाज़ार मे भाजी की धाक रही है
आम जनता की अब हालत देखो बद से बदतर है
 गजब हो रहा मंहगाई की मार पड़ी जब मस्तक पकड़ कर है
रो रहा सोचने पर मजबूर है लोग यहां कैसे गुजारा हो क्या करेंगे अब
बढती हुई मंहगाई को रोकने नियम बनेगी अब के कब ???
 न होगा समस्या पर काबू अगर तो चिंगारी असंतोष की सुलग सकती है
समाधान करो जन जन का तोषण तन मन तभी पुलक सकती है
 -आचार्य तोषण

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